यहाँ **श्रीकृष्ण जन्माष्टमी** पर गीता के उपदेश (श्लोक या सार) के साथ शुभकामना संदेश दिए गए हैं:
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**1.**
"भगवद् गीता का उपदेश है —
‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।’
अर्थात्, हमें अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए, फल की चिंता नहीं करनी चाहिए।
इस जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के उपदेश को जीवन में उतारें।
*****2.**
"गीता कहती है:
'जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है,
तब-तब मैं स्वयं प्रकट होता हूँ।'
(यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत...)
यह जन्माष्टमी जीवन में धर्म की स्थापना का संकल्प लें।
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**3.**
"गीता का उपदेश:
‘हर परिस्थिति में मन शांत रखना चाहिए,
क्योंकि मन ही मित्र भी है और शत्रु भी।’
श्रीकृष्ण की कृपा से आप सदैव शांत और प्रसन्न रहें।
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**4.**
"श्रीकृष्ण कहते हैं—
‘जो हुआ, अच्छा हुआ।
जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है।
जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा।’
अच्छे विचारों और सकारात्मकता के साथ
यह जन्माष्टमी मनाएँ।
जय श्रीकृष्ण!"
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